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mahabharat 2.55.30: ऐसा निश्चय करके, चिन्ता की अग्नि में जलते हुए दुर्योधन ने पुनः गांधारराज शकुनि से बात की।   |   mahabharat अध्याय 2.55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  2.55.30 
एवं स निश्चयं कृत्वा ततो वचनमब्रवीत्।
पुनर्गान्धारनृपतिं दह्यमान इवाग्निना॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा निश्चय करके, चिन्ता की अग्नि में जलते हुए दुर्योधन ने पुनः गांधारराज शकुनि से बात की।
 
Having thus decided, Duryodhana, burning in the fire of worry, once again spoke to Shakuni, the king of Gandharas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)