श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.55.26 
दह्यमाना हि राजान: पाण्डवोत्थेन वह्निना।
क्षान्तवन्तोऽपराधं ते को हि तत् क्षन्तुमर्हति॥ २६॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों की लगाई हुई आग में जल रहे राजाओं ने अपराध क्षमा कर दिया, अन्यथा इतना बड़ा अन्याय कौन सहन कर सकता था?॥26॥
 
The kings who were burning in the fire caused by the Pandavas forgave the crime. Otherwise who could tolerate such a great injustice?॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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