श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.55.25 
पश्य सात्वतमुख्येन शिशुपालो निपातित:।
न च तत्र पुमानासीत् कश्चित् तस्य पदानुग:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
यह भी देखो, यदुवंश के रत्न श्रीकृष्ण ने शिशुपाल को मार डाला, परन्तु उसकी मृत्यु का बदला लेने के लिए कोई वीर तैयार नहीं हुआ ॥25॥
 
Also see, Shri Krishna, the jewel of the Yadu dynasty, killed Sisupala, but there was no brave man ready to avenge his death. ॥ 25॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas