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mahabharat 2.55.20: इस समय धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन उन्मत्त हो रहा था। शकुनि के बार-बार पूछने पर भी वह कोई उत्तर नहीं दे रहा था।   |   mahabharat अध्याय 2.55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  2.55.20 
प्रमत्तो धृतराष्ट्रस्य पुत्रो दुर्योधनस्तदा।
नाभ्यभाषत् सुबलजं भाषमाणं पुन: पुन:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस समय धृतराष्ट्रपुत्र दुर्योधन उन्मत्त हो रहा था। शकुनि के बार-बार पूछने पर भी वह कोई उत्तर नहीं दे रहा था।
 
At this time, Dhritarashtra's son Duryodhan was becoming mad. He was not giving any answer to Shakuni even after his repeated inquiries.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)