श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.55.16 
पाण्डवश्रीप्रतप्तस्य ध्यायमानस्य गच्छत:।
दुर्योधनस्य नृपते: पापा मतिरजायत॥ १६॥
 
 
अनुवाद
पाण्डवों की राजदेवी लक्ष्मी से अप्रसन्न होकर उनका चिन्तन करते हुए राजा दुर्योधन के मन में पापपूर्ण विचार उत्पन्न हुआ ॥16॥
 
Displeased with the Pandava's royal goddess Lakshmi, while thinking about her, a sinful thought arose in the mind of King Duryodhana. ॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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