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mahabharat 2.55.11: जब वह इस तरह ऊपर चढ़ा, तो सब उसकी माया पर हँसने लगे। उसके बाद राजा दुर्योधन को स्फटिक का एक दरवाज़ा दिखाई दिया जो बंद होने पर भी खुला हुआ प्रतीत हो रहा था। जैसे ही वह उसमें घुसा, उसका सिर उससे टकराया और उसे चक्कर आने लगा।   |   mahabharat अध्याय 2.55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.55.11 
आरुरोह तत: सर्वे जहसुश्च पुनर्जना:।
द्वारं तु पिहिताकारं स्फाटिकं प्रेक्ष्य भूमिप:।
प्रविशन्नाहतो मूर्ध्नि व्याघूर्णित इव स्थित:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जब वह इस तरह ऊपर चढ़ा, तो सब उसकी माया पर हँसने लगे। उसके बाद राजा दुर्योधन को स्फटिक का एक दरवाज़ा दिखाई दिया जो बंद होने पर भी खुला हुआ प्रतीत हो रहा था। जैसे ही वह उसमें घुसा, उसका सिर उससे टकराया और उसे चक्कर आने लगा।
 
When he climbed up like this, everyone started laughing at his delusion. After that King Duryodhana saw a door made of crystal which appeared to be open even though it was actually closed. As soon as he entered it, his head hit it and he felt dizzy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)