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mahabharat 2.55.1: वैशम्पायनजी कहते हैं: हे नरश्रेष्ठ जनमेजय! सभाभवन में निवास करते हुए राजा दुर्योधन ने शकुनि के साथ धीरे-धीरे सारी सभा का निरीक्षण किया।॥1॥   |   mahabharat अध्याय 2.55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 55: दुर्योधनका मयनिर्मित सभाभवनको देखना और पग-पगपर भ्रमके कारण उपहासका पात्र बनना तथा युधिष्ठिरके वैभवको देखकर उसका चिन्तित होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.55.1 
वैशम्पायन उवाच
वसन् दुर्योधनस्तस्यां सभायां पुरुषर्षभ।
शनैर्ददर्श तां सर्वां सभां शकुनिना सह॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: हे नरश्रेष्ठ जनमेजय! सभाभवन में निवास करते हुए राजा दुर्योधन ने शकुनि के साथ धीरे-धीरे सारी सभा का निरीक्षण किया।॥1॥
 
Vaishmpayana says: O best of men, Janamejaya! While residing in the assembly hall, king Duryodhana, along with Shakuni, slowly inspected the entire assembly. ॥1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)