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mahabharat 2.54.8-9: पितामह! देवर्षि नारद ने स्वर्ग, अंतरिक्ष और पृथ्वी से संबंधित तीन प्रकार के उपद्रवों का वर्णन किया है। क्या शिशुपाल की मृत्यु से महासंकट शांत हो गया?   |   mahabharat अध्याय 2.54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 8-9
 
 
श्लोक  2.54.8-9 
उत्पातांस्त्रिविधान् प्राह नारदो भगवानृषि:॥ ८॥
दिव्यांश्चैवान्तरिक्षांश्च पार्थिवांश्च पितामह।
अपि चैद्यस्य पतनाच्छन्नमौत्पातिकं महत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
पितामह! देवर्षि नारद ने स्वर्ग, अंतरिक्ष और पृथ्वी से संबंधित तीन प्रकार के उपद्रवों का वर्णन किया है। क्या शिशुपाल की मृत्यु से महासंकट शांत हो गया?
 
Grandfather! Devarshi Lord Narad has described three types of troubles related to heaven, space and earth. Did the great violence subside with the death of Shishupala?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)