Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.54.7-8h: युधिष्ठिर बोले - हे पुरुषश्रेष्ठ! मेरे मन में एक बड़ा संदेह उत्पन्न हो गया है। हे ब्राह्मण! आपके अतिरिक्त इसका समाधान करने वाला दूसरा कोई नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 2.54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 7-8h
 
 
श्लोक  2.54.7-8h 
युधिष्ठिर उवाच
संशयो द्विपदां श्रेष्ठ ममोत्पन्न: सुदुर्लभ:॥ ७॥
तस्य नान्योऽस्ति वक्ता वै त्वामृते द्विजपुङ्गव।
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले - हे पुरुषश्रेष्ठ! मेरे मन में एक बड़ा संदेह उत्पन्न हो गया है। हे ब्राह्मण! आपके अतिरिक्त इसका समाधान करने वाला दूसरा कोई नहीं है।
 
Yudhishthira said - O best of men! A big doubt has arisen in my mind. O Brahmin! There is no one else except you who can solve it. 7 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)