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mahabharat 2.54.5: 'कुन्तीनन्दन! यह बड़े हर्ष की बात है कि आप सम्राट का अत्यंत दुर्लभ पद प्राप्त करके सदैव उन्नति कर रहे हैं। हे कुरुवंश का भार वहन करने वाले राजन! आपने समस्त कुरुवंश को समृद्ध बनाया है।॥5॥   |   mahabharat अध्याय 2.54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.54.5 
दिष्टॺा वर्धसि कौन्तेय साम्राज्यं प्राप्य दुर्लभम्।
वर्धिता: कुरव: सर्वे त्वया कुरुकुलोद्वह॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'कुन्तीनन्दन! यह बड़े हर्ष की बात है कि आप सम्राट का अत्यंत दुर्लभ पद प्राप्त करके सदैव उन्नति कर रहे हैं। हे कुरुवंश का भार वहन करने वाले राजन! आपने समस्त कुरुवंश को समृद्ध बनाया है।॥5॥
 
‘Kuntinandan! It is a matter of great joy that you are always progressing after attaining the extremely rare position of an emperor. O King who bears the burden of the Kuru clan! You have made all the Kuru clan prosperous.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)