श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.54.3 
अथोपविश्य भगवान् काञ्चने परमासने।
आस्यतामिति चोवाच धर्मराजं युधिष्ठिरम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् सुन्दर स्वर्णमय आसन पर बैठकर भगवान व्यास ने धर्मराज युधिष्ठिर से कहा - 'बैठ जाइए' ॥3॥
 
After that, sitting on a beautiful golden seat, Lord Vyas said to Dharmaraja Yudhishthir - 'Sit down'. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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