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वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा स भगवान् कैलासं पर्वतं ययौ।
कृष्णद्वैपायनो व्यास: सह शिष्यै: श्रुतानुगै:॥ १८॥
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: 'हे जनमेजय!' ऐसा कहकर भगवान श्रीकृष्ण अपने शिष्य द्वैपायन व्यास के साथ कैलाश पर्वत पर चले गए, जो वेदों के मार्ग पर चल रहे थे।
Vaishmpayana says: 'O Janamejaya! Having said this, Lord Krishna went to Mount Kailash along with his disciples Dwaipayana Vyasa who were following the path of Vedas.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥