Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 2.54.18: वैशम्पायन कहते हैं: 'हे जनमेजय!' ऐसा कहकर भगवान श्रीकृष्ण अपने शिष्य द्वैपायन व्यास के साथ कैलाश पर्वत पर चले गए, जो वेदों के मार्ग पर चल रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 2.54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.54.18 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्त्वा स भगवान् कैलासं पर्वतं ययौ।
कृष्णद्वैपायनो व्यास: सह शिष्यै: श्रुतानुगै:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: 'हे जनमेजय!' ऐसा कहकर भगवान श्रीकृष्ण अपने शिष्य द्वैपायन व्यास के साथ कैलाश पर्वत पर चले गए, जो वेदों के मार्ग पर चल रहे थे।
 
Vaishmpayana says: 'O Janamejaya! Having said this, Lord Krishna went to Mount Kailash along with his disciples Dwaipayana Vyasa who were following the path of Vedas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)