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mahabharat 2.54.16: हे राजन! तुम ऐसा स्वप्न देखोगे, परन्तु तुम्हें इसकी चिन्ता नहीं करनी चाहिए; क्योंकि समय सबके लिए कठिन है॥16॥   |   mahabharat अध्याय 2.54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.54.16 
एवमीदृशकं स्वप्नं द्रक्ष्यसि त्वं विशाम्पते।
मा तत्कृते ह्यनुध्याहि कालो हि दुरतिक्रम:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! तुम ऐसा स्वप्न देखोगे, परन्तु तुम्हें इसकी चिन्ता नहीं करनी चाहिए; क्योंकि समय सबके लिए कठिन है॥16॥
 
'O King! You will see such a dream, but you should not worry about it; because time is difficult for everyone.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)