श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 54: व्यासजीकी भविष्यवाणीसे युधिष्ठिरकी चिन्ता और समत्वपूर्ण बर्ताव करनेकी प्रतिज्ञा  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  2.54.11 
त्रयोदश समा राजन्नुत्पातानां फलं महत्।
सर्वक्षत्रविनाशाय भविष्यति विशाम्पते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! इस महाविपत्ति का महान फल तेरह वर्षों तक रहेगा। इस समय जो विपत्ति आई है, वह समस्त क्षत्रियों का नाश कर देगी।॥11॥
 
'O King! The great consequences of the calamities last for thirteen years. The calamity that has appeared at this time will destroy all the Kshatriyas.॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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