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श्लोक 2.54.10  |
वैशम्पायन उवाच
राज्ञस्तु वचनं श्रुत्वा पराशरसुत: प्रभु:।
कृष्णद्वैपायनो व्यास इदं वचनमब्रवीत्॥ १०॥ |
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| अनुवाद |
| वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! राजा युधिष्ठिर का यह प्रश्न सुनकर पराशरनन्दन कृष्णद्वैपायन भगवान व्यास ने इस प्रकार कहा-॥ 10॥ |
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| Vaishampayanji says – Janamejaya! Hearing this question of King Yudhishthira, Parasharanandan Krishnadvaipayan Lord Vyas said thus -॥ 10॥ |
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