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mahabharat 2.53.d9: वहाँ राजा ने शुद्ध रत्नों के कुण्डल और हार धारण करके ब्राह्मणों को राजाओं के खाने योग्य नाना प्रकार के भोजन, पेय और नाना प्रकार की चटनियाँ परोसी।   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.53.d9 
राजान: स्रग्विणस्तत्र सुमृष्टमणिकुण्डला:।
विविधान्यन्नपानानि लेह्यानि विविधानि च।
तेषां नृपोपभोग्यानि ब्राह्मणेभ्यो ददु: स्म ते॥
 
 
अनुवाद
वहाँ राजा ने शुद्ध रत्नों के कुण्डल और हार धारण करके ब्राह्मणों को राजाओं के खाने योग्य नाना प्रकार के भोजन, पेय और नाना प्रकार की चटनियाँ परोसी।
 
There, the king, wearing pure precious stone earrings and necklace, served various types of food and drink and various types of chutneys to the Brahmins, fit for the consumption of kings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)