Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.53.d37-63: सात्यकि और कृतवर्मा शीघ्रतापूर्वक उस रथ पर सवार होकर श्रीहरिकी की सेवा के लिए रथ को आगे बढ़ाने लगे। धर्मपुत्र युधिष्ठिर द्वारा पूजित देवेश्वर बलदेवजी तथा सहस्रों यदुवंशी राजा की भाँति वहाँ से चले। तत्पश्चात् श्रेष्ठ स्वर्णमय सिंहासन को त्यागकर श्रीधर्मराज युधिष्ठिर अपने भाइयों सहित महाबली भगवान वासुदेव के पीछे पैदल ही चल पड़े। 63॥ | mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सात्यकि और कृतवर्मा शीघ्रतापूर्वक उस रथ पर सवार होकर श्रीहरिकी की सेवा के लिए रथ को आगे बढ़ाने लगे। धर्मपुत्र युधिष्ठिर द्वारा पूजित देवेश्वर बलदेवजी तथा सहस्रों यदुवंशी राजा की भाँति वहाँ से चले। तत्पश्चात् श्रेष्ठ स्वर्णमय सिंहासन को त्यागकर श्रीधर्मराज युधिष्ठिर अपने भाइयों सहित महाबली भगवान वासुदेव के पीछे पैदल ही चल पड़े। 63॥
Satyaki and Kritavarma quickly mounted on that chariot and started moving the chariot for the service of Sri Hariki. Deveshwar Baldevji and thousands of Yaduvanshi, worshiped by Dharma's son Yudhishthir, departed from there like a king. Thereafter, leaving the best golden throne, Shri Dharmaraja Yudhishthir along with his brothers started following the mighty Lord Vasudev on foot. 63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥