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mahabharat 2.53.d36: वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! इस प्रकार यज्ञ की समाप्ति पर राजा युधिष्ठिर ने लक्ष्मीपति भगवान श्रीकृष्ण, देवेश्वर बलदेव तथा कुरुश्रेष्ठ भीष्म आदि की पूजा की।   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.53.d36 
वैशम्पायन उवाच
अथ यज्ञं समाप्यान्ते पूजयामास माधवम्।
बलदेवं च देवेशं भीष्माद्यांश्च कुरूत्तमान्॥)
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं- जनमेजय! इस प्रकार यज्ञ की समाप्ति पर राजा युधिष्ठिर ने लक्ष्मीपति भगवान श्रीकृष्ण, देवेश्वर बलदेव तथा कुरुश्रेष्ठ भीष्म आदि की पूजा की।
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! In this way, at the end of the Yagya, King Yudhishthir worshiped Lakshmipati Lord Shri Krishna, Deveshwar Baldev and Kurusrestha Bhishma etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)