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युधिष्ठिर उवाच
युष्मत्प्रभावात् प्राप्तोऽयं राजसूयो महाक्रतु:।
जनार्दनप्रभावाच्च सम्पूर्णो मे मनोरथ:॥
अनुवाद
युधिष्ठिर ने उनसे कहा - महर्षि! आपके प्रभाव से यह राजसूय महायज्ञ सांगोपांग सम्पन्न हुआ। भगवान श्रीकृष्ण के तेज से मेरी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण हुईं।
Yudhishthir said to him – Maharshi! Due to your influence, this Rajsuya Mahayagya Sangopang was completed. All my wishes were fulfilled by the glory of Lord Krishna.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥