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श्लोक  2.53.d35 
युधिष्ठिर उवाच
युष्मत्प्रभावात् प्राप्तोऽयं राजसूयो महाक्रतु:।
जनार्दनप्रभावाच्च सम्पूर्णो मे मनोरथ:॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने उनसे कहा - महर्षि! आपके प्रभाव से यह राजसूय महायज्ञ सांगोपांग सम्पन्न हुआ। भगवान श्रीकृष्ण के तेज से मेरी समस्त मनोकामनाएँ पूर्ण हुईं।
 
Yudhishthir said to him – Maharshi! Due to your influence, this Rajsuya Mahayagya Sangopang was completed. All my wishes were fulfilled by the glory of Lord Krishna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)