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mahabharat 2.53.d29: धर्मराज युधिष्ठिर उस यज्ञ में सदैव वस्त्र, कम्बल, चादरें, स्वर्ण पदक, स्वर्ण पात्र तथा सभी प्रकार के आभूषण दान करते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.53.d29 
वस्त्राणि कम्बलांश्चैव प्रावारांश्चैव सर्वदा।
निष्कहेमजभाण्डानि भूषणानि च सर्वश:।
प्रददौ तत्र सततं धर्मराजो युधिष्ठिर:॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर उस यज्ञ में सदैव वस्त्र, कम्बल, चादरें, स्वर्ण पदक, स्वर्ण पात्र तथा सभी प्रकार के आभूषण दान करते थे।
 
Dharmaraja Yudhishthira always donated clothes, blankets, sheets, gold medals, gold utensils and all kinds of ornaments in that yajna.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)