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mahabharat 2.53.d22: नारद, तेजस्वी तुम्बुरु, विश्वावसु, चित्रसेन तथा अन्य गीत-कुशल गंधर्व यज्ञ अनुष्ठानों के बीच-बीच में गीत गाकर सबका मनोरंजन करते थे।   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.53.d22 
नारदश्च जगौ तत्र तुम्बुरुश्च महाद्युति:।
विश्वावसुश्चित्रसेनस्तथान्ये गीतकोविदा:।
रमयन्ति स्म तान् सर्वान् यज्ञकर्मान्तरेष्वथ॥
 
 
अनुवाद
नारद, तेजस्वी तुम्बुरु, विश्वावसु, चित्रसेन तथा अन्य गीत-कुशल गंधर्व यज्ञ अनुष्ठानों के बीच-बीच में गीत गाकर सबका मनोरंजन करते थे।
 
Narada, the brilliant Tumburu, Vishvavasu, Chitrasena and other lyrically skilled Gandharvas used to entertain everyone by singing songs at intervals between the yagya rituals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)