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mahabharat 2.53.d10: उस यज्ञ में उपर्युक्त वस्तुओं का निरन्तर सेवन करने से सभी ब्राह्मण आनन्द में मग्न हो गये तथा उन्हें महान् संतोष और प्रसन्नता का अनुभव हुआ।   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक d10
 
 
श्लोक  2.53.d10 
एतानि सततं भुक्त्वा तस्मिन् यज्ञे द्विजातय:।
परां प्रीतिं ययु: सर्वे मोदमानास्तदा भृशम्॥
 
 
अनुवाद
उस यज्ञ में उपर्युक्त वस्तुओं का निरन्तर सेवन करने से सभी ब्राह्मण आनन्द में मग्न हो गये तथा उन्हें महान् संतोष और प्रसन्नता का अनुभव हुआ।
 
By continuously eating the above mentioned items in that yagya, all the brahmins were engrossed in joy and felt great satisfaction and happiness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)