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श्लोक  2.53.7 
प्राग्ज्योतिषपुरं यातानस्मान् ज्ञात्वा नृशंसकृत्।
अदहद् द्वारकामेष स्वस्रीय: सन् नराधिपा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'हे मनुष्यों के स्वामी! जब उसे पता चला कि हम प्राग्ज्योतिषपुर गए हैं, तो इस क्रूर व्यक्ति ने मेरे पिता का भतीजा होते हुए भी द्वारका को आग लगा दी।
 
'O Lord of men! When he came to know that we had gone to Pragjyotishpur, this cruel person, despite being my father's nephew, set Dwarka on fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)