गते द्वारवतीं कृष्णे सात्वतप्रवरे नृप॥ ६७॥
एको दुर्योधनो राजा शकुनिश्चापि सौबल:।
तस्यां सभायां दिव्यायामूषतुस्तौ नरर्षभौ॥ ६८॥
अनुवाद
राजन! यदुवंश शिरोमणि श्रीकृष्ण के द्वारका चले जाने पर भी राजा दुर्योधन और सुबलपुत्र शकुनि- ये दोनों महापुरुष उस दिव्य सभा भवन में ही रहे। 67-68॥
Rajan! Even after Yaduvansh Shiromani Shri Krishna went to Dwarka, King Duryodhana and Subala's son Shakuni - these two great men remained in that divine assembly hall. 67-68॥
इति श्रीमहाभारते सभापर्वणि शिशुपालवधपर्वणि शिशुपालवधे पञ्चचत्वारिंशोऽध्याय:॥ ४५॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सभापर्वके अन्तर्गत शिशुपालवधपर्वमें शिशुपालवधविषयक पैंतालीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ४५॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके ४२ श्लोक मिलाकर कुल ११० श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)