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mahabharat 2.53.64: तब कमलनयन भगवान श्रीहरि ने दो क्षण के लिए अपना उत्तम रथ रोककर कुन्तीकुमार युधिष्ठिर से कहा- 64॥   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.53.64 
ततो मुहूर्तं संगृह्य स्यन्दनप्रवरं हरि:।
अब्रवीत् पुण्डरीकाक्ष: कुन्तीपुत्रं युधिष्ठिरम्॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
तब कमलनयन भगवान श्रीहरि ने दो क्षण के लिए अपना उत्तम रथ रोककर कुन्तीकुमार युधिष्ठिर से कहा- 64॥
 
Then lotus-eyed Lord Shri Hari stopped his best chariot for two moments and said to Kuntikumar Yudhishthira - 64॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)