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mahabharat 2.53.6: 'भूमिपालों! यह यदुकुल की कन्या का पुत्र है, परन्तु हम लोगों से इसका घोर वैर है। यद्यपि यादवों ने कभी कोई अपराध नहीं किया, फिर भी यह क्रूर आत्मा उनका अहित करने में लगा रहता है। 6॥   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  2.53.6 
एष न: शत्रुरत्यन्तं पार्थिवा: सात्वतीसुत:।
सात्वतानां नृशंसात्मा न हितोऽनपकारिणाम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'भूमिपालों! यह यदुकुल की कन्या का पुत्र है, परन्तु हम लोगों से इसका घोर वैर है। यद्यपि यादवों ने कभी कोई अपराध नहीं किया, फिर भी यह क्रूर आत्मा उनका अहित करने में लगा रहता है। 6॥
 
‘Landkeepers! This is the son of a girl from Yadukul, but he has extreme enmity towards us. Although the Yadavas have never committed any crime, yet this cruel soul remains engaged in their harm. 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)