Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.53.56-58: ‘किन्तु आपको द्वारकापुरी जाना आवश्यक है।’ ऐसा कहकर परम यशस्वी एवं धर्मात्मा श्रीहरि युधिष्ठिर को साथ लेकर उनकी बुआ कुन्ती के पास गए और प्रसन्नतापूर्वक बोले—‘बुआ! आपके पुत्रों को अब राज्य प्राप्त हो गया है, उनकी मनोकामना पूर्ण हो गई है। वे सभी धन-रत्नों से युक्त हो गए हैं। अब आप उनके साथ सुखपूर्वक रहें। यदि आपकी अनुमति हो, तो मैं द्वारका जाना चाहता हूँ।’॥ 56-58॥ | mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘किन्तु आपको द्वारकापुरी जाना आवश्यक है।’ ऐसा कहकर परम यशस्वी एवं धर्मात्मा श्रीहरि युधिष्ठिर को साथ लेकर उनकी बुआ कुन्ती के पास गए और प्रसन्नतापूर्वक बोले—‘बुआ! आपके पुत्रों को अब राज्य प्राप्त हो गया है, उनकी मनोकामना पूर्ण हो गई है। वे सभी धन-रत्नों से युक्त हो गए हैं। अब आप उनके साथ सुखपूर्वक रहें। यदि आपकी अनुमति हो, तो मैं द्वारका जाना चाहता हूँ।’॥ 56-58॥
‘But it is necessary for you to go to Dwarkapuri.’ On his saying this, the highly renowned and righteous Shri Hari took Yudhishthira along with him to his aunt Kunti and said happily—‘Aunt! Your sons have now acquired the kingdom, their wish has been fulfilled. All of them are blessed with wealth and gems. Now you live happily with them. If you permit, I want to go to Dwarka.’॥ 56-58॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥