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mahabharat 2.53.50-51: इसी प्रकार अन्य क्षत्रिय सरदार भी अन्य क्षत्रिय राजाओं के पीछे-पीछे चले। इसी प्रकार समस्त ब्राह्मण भी अत्यन्त सम्मानित होकर हजारों की संख्या में वहाँ से चले गए। राजाओं और ब्राह्मणों के चले जाने पर महाप्रतापी भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा -॥50-51॥   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 50-51
 
 
श्लोक  2.53.50-51 
अन्वगच्छंस्तथैवान्यान् क्षत्रियान् क्षत्रियर्षभा:।
एवं सुपूजिता: सर्वे जग्मुर्विप्रा: सहस्रश:॥ ५०॥
गतेषु पार्थिवेन्द्रेषु सर्वेषु ब्राह्मणेषु च।
युधिष्ठिरमुवाचेदं वासुदेव: प्रतापवान्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार अन्य क्षत्रिय सरदार भी अन्य क्षत्रिय राजाओं के पीछे-पीछे चले। इसी प्रकार समस्त ब्राह्मण भी अत्यन्त सम्मानित होकर हजारों की संख्या में वहाँ से चले गए। राजाओं और ब्राह्मणों के चले जाने पर महाप्रतापी भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा -॥50-51॥
 
Similarly, other Kshatriya leaders followed other Kshatriya kings. Similarly, all the Brahmins, being highly respected, departed from there in thousands. After the departure of the kings and Brahmins, the majestic Lord Krishna said to Yudhishthira -॥ 50-51॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)