Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 2.53.37: तत्पश्चात् परम तेजस्वी कुरुराज युधिष्ठिर का समस्त धन और वैभव से युक्त राजसूय यज्ञ, तरुण राजाओं के सुख को बढ़ाने वाला, अतुलनीय वैभव प्राप्त करने लगा ॥37॥ | mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन । mahabharat पर्व 2: सभा पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत: स कुरुराजस्य क्रतु: सर्वसमृद्धिमान्।
यूनां प्रीतिकरो राजन् स बभौ विपुलौजस:॥ ३७॥
अनुवाद
तत्पश्चात् परम तेजस्वी कुरुराज युधिष्ठिर का समस्त धन और वैभव से युक्त राजसूय यज्ञ, तरुण राजाओं के सुख को बढ़ाने वाला, अतुलनीय वैभव प्राप्त करने लगा ॥37॥
Thereafter, the Rajasuya Yajna, filled with all the riches and splendor of the most brilliant Kuru king Yudhishthira, started gaining incomparable splendor, increasing the happiness of the young kings. 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥