श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 34-35
 
 
श्लोक  2.53.34-35 
पाण्डवस्त्वब्रवीद् भ्रातॄन् सत्कारेण महीपतिम्॥ ३४॥
दमघोषात्मजं वीरं संस्कारयत मा चिरम्।
तथा च कृतवन्तस्ते भ्रातुर्वै शासनं तदा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
पाण्डुपुत्र युधिष्ठिर ने अपने भाइयों से कहा - ‘दमघोष के पुत्र वीर राजा शिशुपाल का अन्त्येष्टि संस्कार बड़े आदरपूर्वक करो, इसमें विलम्ब न करो।’ पाण्डवों ने अपने भाई की आज्ञा का यथावत् पालन किया ॥34-35॥
 
Pandanu's son Yudhishthir said to his brothers - 'Perform the funeral rites of the brave king Shishupal, son of Damaghosh, with great respect, do not delay in it.' Pandavas followed his brother's order exactly. 34-35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)