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mahabharat 2.53.31: कुछ अन्य राजा अत्यन्त क्रोध से भरकर अपने हाथों को मलने लगे, तथा कुछ अन्य क्रोध में अचेत होकर अपने दांतों से अपने होंठ काटने लगे।   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  2.53.31 
हस्तैर्हस्ताग्रमपरे प्रत्यपिंषन्नमर्षिता:।
अपरे दशनैरोष्ठानदशन् क्रोधमूर्च्छिता:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
कुछ अन्य राजा अत्यन्त क्रोध से भरकर अपने हाथों को मलने लगे, तथा कुछ अन्य क्रोध में अचेत होकर अपने दांतों से अपने होंठ काटने लगे।
 
Some other kings, filled with great resentment, began rubbing their hands with their hands, and others, unconscious in rage, began biting their lips with their teeth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)