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mahabharat 2.53.25: ऐसा कहकर क्रोधित शत्रु यदुकुल भगवान श्रीकृष्ण ने उसी क्षण अपने चक्र से चेदिराज शिशुपाल का सिर काट डाला ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.53.25 
एवमुक्त्वा यदुश्रेष्ठश्चेदिराजस्य तत्क्षणात्।
व्यपाहरच्छिर: क्रुद्धश्चक्रेणामित्रकर्षण:॥ २५॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर क्रोधित शत्रु यदुकुल भगवान श्रीकृष्ण ने उसी क्षण अपने चक्र से चेदिराज शिशुपाल का सिर काट डाला ॥25॥
 
Saying this, the enraged enemy Yadukula Tilak Lord Shri Krishna at that very moment cut off the head of Chediraj Shishupala with his Chakra. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)