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mahabharat 2.53.22: विचार करते ही चक्र मेरे हाथ में आ गया। तब बोलने में कुशल भगवान श्रीकृष्ण ने ऊंचे स्वर में ये वचन कहे- 22॥   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.53.22 
एतस्मिन्नेव काले तु चक्रे हस्तगते सति।
उवाच भगवानुच्चैर्वाक्यं वाक्यविशारद:॥ २२॥
 
 
अनुवाद
विचार करते ही चक्र मेरे हाथ में आ गया। तब बोलने में कुशल भगवान श्रीकृष्ण ने ऊंचे स्वर में ये वचन कहे- 22॥
 
As soon as I thought, the chakra came into my hand. Then Lord Shri Krishna, who was skilled in speaking, said these words in a loud voice – 22॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)