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mahabharat 2.53.17: श्रीकृष्ण के उपर्युक्त वचन सुनकर महाबली शिशुपाल जोर-जोर से हंसने लगा और इस प्रकार बोला-॥17॥   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  2.53.17 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा शिशुपाल: प्रतापवान्।
जहास स्वनवद्धासं वाक्यं चेदमुवाच ह॥ १७॥
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण के उपर्युक्त वचन सुनकर महाबली शिशुपाल जोर-जोर से हंसने लगा और इस प्रकार बोला-॥17॥
 
On hearing the above words of Sri Krishna, the mighty Shishupal began to laugh out loud and said thus -॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)