श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  2.53.16 
वैशम्पायन उवाच
एवमादि तत: सर्वे सहितास्ते नराधिपा:।
वासुदेववच: श्रुत्वा चेदिराजं व्यगर्हयन्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भगवान श्रीकृष्ण के ये सब वचन सुनकर उन सब राजाओं ने एक स्वर से चेदिराज शिशुपाल को धिक्कारा और उसकी निन्दा की॥16॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! Hearing all these words of Lord Shri Krishna, all those kings with one voice cursed and condemned Chediraj Shishupal. 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)