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mahabharat 2.53.15: अब वह मरना चाहता है। इस मूर्ख ने पहले अपने कुटुम्बियों से रुक्मिणी के लिए याचना की थी, परन्तु जैसे शूद्र वेद की ऋचाएँ नहीं सुन सकता, वैसे ही यह अज्ञानी उसे प्राप्त नहीं कर सका॥15॥   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  2.53.15 
रुक्मिण्यामस्य मूढस्य प्रार्थनाऽऽसीन्मुमूर्षत:।
न च तां प्राप्तवान् मूढ: शूद्रो वेदश्रुतीमिव॥ १५॥
 
 
अनुवाद
अब वह मरना चाहता है। इस मूर्ख ने पहले अपने कुटुम्बियों से रुक्मिणी के लिए याचना की थी, परन्तु जैसे शूद्र वेद की ऋचाएँ नहीं सुन सकता, वैसे ही यह अज्ञानी उसे प्राप्त नहीं कर सका॥15॥
 
‘Now he wishes to die. This fool had earlier begged his relatives for Rukmini, but just as a Shudra cannot listen to the verses of the Vedas, similarly this ignorant person could not get her.'॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)