vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 2: सभा पर्व
»
अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन
»
श्लोक 14
श्लोक
2.53.14
इमं त्वस्य न शक्ष्यामि क्षन्तुमद्य व्यतिक्रमम्।
अवलेपाद् वधार्हस्य समग्रे राजमण्डले॥ १४॥
अनुवाद
'परन्तु आज अहंकारवश उसने समस्त राजाओं के सामने मेरे साथ जो दुर्व्यवहार किया है, उसे मैं कभी क्षमा नहीं कर सकूँगा॥14॥
'But today out of arrogance he has mistreated me in front of all the kings, I will never be able to forgive him.॥ 14॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd