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mahabharat 2.53.12: "मैं अपनी मौसी की संतुष्टि के लिए ही उसके अत्यन्त वीभत्स अपराधों को सहन कर रहा हूँ; सौभाग्य की बात है कि आज वह समस्त राजाओं के समक्ष उपस्थित है।" 12.   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  2.53.12 
पितृष्वसु: कृते दु:खं सुमहन्मर्षयाम्यहम्।
दिष्टॺा हीदं सर्वराज्ञां संनिधावद्य वर्तते॥ १२॥
 
 
अनुवाद
"मैं अपनी मौसी की संतुष्टि के लिए ही उसके अत्यन्त वीभत्स अपराधों को सहन कर रहा हूँ; सौभाग्य की बात है कि आज वह समस्त राजाओं के समक्ष उपस्थित है।" 12.
 
"It is only for the sake of my aunt's satisfaction that I am tolerating his most gruesome crimes; it is fortunate that today he is present in the presence of all the kings." 12.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)