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mahabharat 2.53.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीष्मजी के ये वचन सुनकर महाबली चेदिराज शिशुपाल भगवान वसुदेवजी से युद्ध करने के लिए उत्सुक होकर उनसे इस प्रकार बोले -॥1॥   |   mahabharat अध्याय 2.53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 53: श्रीकृष्णके द्वारा शिशुपालका वध, राजसूययज्ञकी समाप्ति तथा सभी ब्राह्मणों, राजाओं और श्रीकृष्णका स्वदेशगमन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  2.53.1 
वैशम्पायन उवाच
तत: श्रुत्वैव भीष्मस्य चेदिराडुरुविक्रम:।
युयुत्सुर्वासुदेवेन वासुदेवमुवाच ह॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीष्मजी के ये वचन सुनकर महाबली चेदिराज शिशुपाल भगवान वसुदेवजी से युद्ध करने के लिए उत्सुक होकर उनसे इस प्रकार बोले -॥1॥
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! On hearing these words of Bhishma, the mighty Chedi king Shishupal, eager to fight with Lord Vasudeva, spoke to him thus:॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)