श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  2.52.9 
वङ्गाङ्गविषयाध्यक्षं सहस्राक्षसमं बले।
स्तुहि कर्णमिमं भीष्म महाचापविकर्षणम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
भीष्म! जो वंग और अंग दोनों देशों का राजा है, जो इन्द्र के समान पराक्रमी है और महान धनुष की डोरी खींचने में समर्थ है, उस पराक्रमी कर्ण की स्तुति करो॥9॥
 
Bhishma! Sing the praises of the valiant Karna who is the king of both the countries, Vanga and Anga, who is as powerful as Indra and who can pull the great bowstring.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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