श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  2.52.5 
वैशम्पायन उवाच
ततो न ममृषे चैद्यस्तद् भीष्मवचनं तदा।
उवाच चैनं संक्रुद्ध: पुनर्भीष्ममथोत्तरम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! भीष्म का यह कथन शिशुपाल को सहन न हुआ। वह पुनः अत्यन्त क्रोधित हो गया और भीष्मजी से उनके वचनों के उत्तर में बोला ॥5॥
 
Vaishampayana says - Janamejaya! Shishupal could not tolerate this statement of Bhishma. He again became very angry and said to Bhishma in reply to his words. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)