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mahabharat 2.52.36: राजा भीष्म के ये वचन सुनकर कुछ महाधनुर्धर धनुर्धरों ने कहा, 'यह बूढ़ा भीष्म पापी और अहंकारी है, इसलिए क्षमा के योग्य नहीं है।   |   mahabharat अध्याय 2.52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  2.52.36 
केचिदूचुर्महेष्वासा: श्रुत्वा भीष्मस्य तद् वच:।
पापोऽवलिप्तो वृद्धश्च नायं भीष्मोऽर्हति क्षमाम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
राजा भीष्म के ये वचन सुनकर कुछ महाधनुर्धर धनुर्धरों ने कहा, 'यह बूढ़ा भीष्म पापी और अहंकारी है, इसलिए क्षमा के योग्य नहीं है।
 
On hearing these words of King Bhishma, some great archers said, 'This old Bhishma is a sinner and arrogant; therefore, he is not worthy of forgiveness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)