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mahabharat 2.52.34: 'ओह! शिशुपाल के वचनानुसार मैं इन राजाओं की इच्छा से जी रहा हूँ; परंतु मैं इन सब राजाओं को तिनके के बराबर भी नहीं समझता हूँ।'॥34॥   |   mahabharat अध्याय 2.52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  2.52.34 
इच्छतां किल नामाहं जीवाम्येषां महीक्षिताम्।
सोऽहं न गणयाम्येतांस्तृणेनापि नराधिपान्॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'ओह! शिशुपाल के वचनानुसार मैं इन राजाओं की इच्छा से जी रहा हूँ; परंतु मैं इन सब राजाओं को तिनके के बराबर भी नहीं समझता हूँ।'॥34॥
 
'Oh! As per the words of Sisupala, I am living at the will of these kings; but I do not consider all these kings even worth a straw.'॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)