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श्री महाभारत
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पर्व 2: सभा पर्व
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अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना
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श्लोक 30
श्लोक
2.52.30
सा हि मांसार्गलं भीष्म मुखात् सिंहस्य खादत:।
दन्तान्तरविलग्नं यत् तदादत्तेऽल्पचेतना॥ ३०॥
अनुवाद
भीष्म! वह मूर्ख पक्षी मांस खाते समय सिंह के दांतों में लगे मांस के टुकड़ों को अपनी चोंच से नोचता रहता है ॥30॥
Bhishma! That foolish bird keeps on pecking with its beak the pieces of meat stuck in the teeth of the lion while eating meat. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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