श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.52.28 
भूलिङ्गशकुनिर्नाम पार्श्वे हिमवत: परे।
भीष्म तस्या: सदा वाच: श्रूयन्तेऽर्थविगर्हिता:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
भीष्म! हिमालय के उस पार भूलिंग नामक एक पक्षी रहता है। उसके मुख से सदैव ऐसे शब्द सुनाई देते हैं जो अत्यन्त निन्दनीय प्रतीत होते हैं, क्योंकि वे उसके कर्म के विपरीत भाव को सूचित करते हैं॥ 28॥
 
Bhishma! In the other part of the Himalayas lives a bird known as Bhuling. From its mouth always such words are heard which seem to be extremely condemnable because they indicate the opposite intention of its action.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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