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mahabharat 2.52.26: दुष्टात्मा कृष्ण राजा कंस के सेवक हैं, उनकी गौओं के चरवाहे रहे हैं। तुम केवल अपने स्वार्थ के कारण ही सम्पूर्ण जगत को इसमें सम्मिलित कर रहे हो॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 2.52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.52.26 
कथं भोजस्य पुरुषे वर्गपाले दुरात्मनि।
समावेशयसे सर्वं जगत् केवलकाम्यया॥ २६॥
 
 
अनुवाद
दुष्टात्मा कृष्ण राजा कंस के सेवक हैं, उनकी गौओं के चरवाहे रहे हैं। तुम केवल अपने स्वार्थ के कारण ही सम्पूर्ण जगत को इसमें सम्मिलित कर रहे हो॥ 26॥
 
The evil-souled Krishna is the servant of King Kansa, he has been the shepherd of his cows. You are including the whole world in this only for your selfish reasons.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)