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mahabharat 2.52.24: भीष्म! अपनी निन्दा, अपनी प्रशंसा, पर-निन्दा और पर-स्तुति - ये चार प्रकार के कार्य पूर्वकाल के महापुरुषों ने कभी नहीं किये हैं ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 2.52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  2.52.24 
आत्मनिन्दाऽऽत्मपूजा च परनिन्दा परस्तव:।
अनाचरितमार्याणां वृत्तमेतच्चतुर्विधम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
भीष्म! अपनी निन्दा, अपनी प्रशंसा, पर-निन्दा और पर-स्तुति - ये चार प्रकार के कार्य पूर्वकाल के महापुरुषों ने कभी नहीं किये हैं ॥24॥
 
Bhishma! Criticism of oneself, praise of oneself, criticism of others and praise of others - these four types of work have never been done by the great men of the past. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)