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आत्मनिन्दाऽऽत्मपूजा च परनिन्दा परस्तव:।
अनाचरितमार्याणां वृत्तमेतच्चतुर्विधम्॥ २४॥
अनुवाद
भीष्म! अपनी निन्दा, अपनी प्रशंसा, पर-निन्दा और पर-स्तुति - ये चार प्रकार के कार्य पूर्वकाल के महापुरुषों ने कभी नहीं किये हैं ॥24॥
Bhishma! Criticism of oneself, praise of oneself, criticism of others and praise of others - these four types of work have never been done by the great men of the past. 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥