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mahabharat 2.52.15-16: तुम महापराक्रमी दुर्योधन, समुद्रपर्यन्त सम्पूर्ण पृथ्वी पर अतुलनीय पराक्रमी राजा, शस्त्रविद्या में निपुण पराक्रमी राजा जयद्रथ तथा विश्वविख्यात शक्तिशाली किम्पुरुषचार्य द्रुम् को छोड़कर श्रीकृष्ण की स्तुति क्यों करते हो? 15-16॥   |   mahabharat अध्याय 2.52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 52: भीष्मकी बातोंसे चिढ़े हुए शिशुपालका उन्हें फटकारना तथा भीष्मका श्रीकृष्णसे युद्ध करनेके लिये समस्त राजाओंको चुनौती देना  »  श्लोक 15-16
 
 
श्लोक  2.52.15-16 
पृथिव्यां सागरान्तायां यो वै प्रतिसमो भवेत्।
दुर्योधनं त्वं राजेन्द्रमतिक्रम्य महाभुजम्॥ १५॥
जयद्रथं च राजानं कृतास्त्रं दृढविक्रमम्।
द्रुमं किम्पुरुषाचार्यं लोके प्रथितविक्रमम्।
अतिक्रम्य महावीर्यं किं प्रशंससि केशवम्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
तुम महापराक्रमी दुर्योधन, समुद्रपर्यन्त सम्पूर्ण पृथ्वी पर अतुलनीय पराक्रमी राजा, शस्त्रविद्या में निपुण पराक्रमी राजा जयद्रथ तथा विश्वविख्यात शक्तिशाली किम्पुरुषचार्य द्रुम् को छोड़कर श्रीकृष्ण की स्तुति क्यों करते हो? 15-16॥
 
Why do you praise Krishna, leaving aside the mighty mighty Duryodhana, the mighty king who is incomparable in the entire earth up to this sea, the powerful king Jayadratha, who is adept in the art of weaponry, and the world-famous powerful Kimpurusha-charya Druma? 15-16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)