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mahabharat 2.51.7-8: 'मेरे पुत्र के विषय में जिन लोगों ने ऐसा कहा है, मैं उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ। चाहे वे देवता हों या कोई अन्य प्राणी? वे मेरे प्रश्न का उत्तर दें। मैं यह सत्य सुनना चाहता हूँ कि मेरे पुत्र की मृत्यु का कारण कौन होगा?'॥ 7-8॥   |   mahabharat अध्याय 2.51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 2: सभा पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 2: सभा पर्व  »  अध्याय 51: भीष्मजीके द्वारा शिशुपालके जन्मके वृत्तान्तका वर्णन  »  श्लोक 7-8
 
 
श्लोक  2.51.7-8 
येनेदमीरितं वाक्यं ममैतं तनयं प्रति।
प्राञ्जलिस्तं नमस्यामि ब्रवीतु स पुनर्वच:॥ ७॥
याथातथ्येन भगवान् देवो वा यदि वेतर:।
श्रोतुमिच्छामि पुत्रस्य कोऽस्य मृत्युर्भविष्यति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'मेरे पुत्र के विषय में जिन लोगों ने ऐसा कहा है, मैं उन्हें हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ। चाहे वे देवता हों या कोई अन्य प्राणी? वे मेरे प्रश्न का उत्तर दें। मैं यह सत्य सुनना चाहता हूँ कि मेरे पुत्र की मृत्यु का कारण कौन होगा?'॥ 7-8॥
 
‘I bow down with folded hands to those who have said this about my son. Be it a god or any other creature? Let them answer my question. I want to hear the truth about who will be the cause of my son's death?'॥ 7-8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)