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श्लोक 2.51.5  |
न च वै तस्य मृत्युर्वै न काल: प्रत्युपस्थित:।
मृत्युर्हन्तास्य शस्त्रेण स चोत्पन्नो नराधिप॥ ५॥ |
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| अनुवाद |
| हे मनुष्यों के स्वामी! अभी न तो उसकी मृत्यु हुई है, न ही उसका समय आया है। जो उसकी मृत्यु का कारण है और जो उसे शस्त्र से मारेगा, वह तो अन्यत्र जन्म ले चुका है।॥5॥ |
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| ‘Lord of men! His death has not yet come, nor has time arrived. The one who is the cause of his death and the one who will kill him with a weapon has already been born elsewhere.’॥ 5॥ |
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